एक जंगल था, जहां ताकत नियम बनाती थी।
उस जंगल का राजा शेर था।
शेर ज्यादा बातें नहीं करता था। उसे करने की जरूरत भी नहीं थी। उसकी मौजूदगी ही काफी थी। उसका आदेश साफ था।
खाना लाओ, नहीं तो खुद खाना बन जाओ।
जंगल के जानवर इस सच्चाई को समझते थे। वहां तर्क नहीं चलता था। वहां दया नहीं मिलती थी। वहां सिर्फ ताकत का राज था।
लेकिन हर जंगल में ताकत के साथ एक और चीज होती है। चालाकी।
लोमड़ी जो सब कुछ देख रही थी
लोमड़ी ने शेर को देखा। उसने समझ लिया कि शेर से टकराना बेवकूफी है।
लेकिन उसने यह भी समझ लिया कि शेर को खिलाया जा सकता है।
लोमड़ी ने ताकत से नहीं, दिमाग से काम लिया।
उसे किसी ऐसे की जरूरत थी जो मेहनती हो, भरोसेमंद हो और सबसे जरूरी, थोड़ा भोला हो।
तभी उसकी नजर गधे पर पड़ी।
गधा कमजोर नहीं था। वह सालों से बोझ ढोता आया था। मेहनत करना उसकी आदत थी।
लेकिन उसके भीतर एक खामोश इच्छा थी।
कुछ बड़ा बनने की।
साधारण न रह जाने की।
लोमड़ी को यही चाहिए था।
मीठे शब्दों में लिपटा एक सपना
लोमड़ी ने गधे को डराया नहीं।
उसने सच नहीं बताया।
उसने सपना दिखाया।
उसने कहा, शेर तुम्हें राजा बनाना चाहता है। जंगल को नया नेतृत्व चाहिए। तुम्हारी मेहनत आखिरकार देखी गई है।
गधे का दिल जोर से धड़कने लगा।
जिसने जिंदगी भर बोझ उठाया हो, जब उसे कहा जाए कि अब तुम्हें ताज पहनाया जाएगा, तो दिमाग पीछे रह जाता है।
गधा लोमड़ी के साथ चल पड़ा।
पहला सबक जो दर्द देता है, लेकिन खत्म नहीं करता
जैसे ही वे शेर के पास पहुंचे, सच्चाई सामने आ गई।
शेर ने मुकुट नहीं पहनाया। उसने हमला कर दिया।
गधा जान बचाकर भागा। लेकिन उसके कान नहीं बचे।
दर्द, गुस्सा, डर सब एक साथ थे।
उसने लोमड़ी से चिल्लाकर कहा, तुमने मुझे धोखा दिया।
लोमड़ी शांत रही।
उसने कहा, बेवकूफ मत बनो। शेर ने तुम्हारे कान इसलिए काटे ताकि मुकुट ठीक से बैठ सके।
यहां कहानी एक खतरनाक मोड़ लेती है।
क्योंकि गधे को चोट तो लगी थी, लेकिन उसे एक वजह भी दे दी गई थी।
और जब दर्द को अर्थ मिल जाए, तो इंसान उसे सह लेता है।
जब दर्द को नजरअंदाज किया जाता है, वह और जोर से लौटता है
कुछ समय बाद लोमड़ी फिर आई।
इस बार उसने कहा, अब तुम तैयार हो। अब तुम आराम से सिंहासन पर बैठ सकते हो।
गधे को अंदर से डर लग रहा था।
लेकिन उम्मीद अभी भी जिंदा थी।
वह फिर गया।
इस बार उसकी पूंछ चली गई।
फिर भी वह बच गया।
और यहीं पर बहुत लोग असली गलती करते हैं।
वे सोचते हैं, मैं बच गया।
इसका मतलब यह ठीक था।
नहीं।
इसका मतलब सिर्फ यह था कि चेतावनी मिल चुकी थी।
तीसरी बार बदकिस्मती नहीं होती
जब लोमड़ी तीसरी बार आई, तो न कोई डर था, न कोई सवाल।
गधा चुपचाप उसके पीछे चल पड़ा।
इस बार वह वापस नहीं आया।
शेर ने उसे मार दिया।
लोमड़ी ने शेर को उसके अंग दिए। फेफड़े, दिल, जिगर।
लेकिन दिमाग नहीं।
शेर ने पूछा, दिमाग कहां है?
लोमड़ी ने कहा, अगर उसके पास होता, तो वह कान और पूंछ खोने के बाद वापस नहीं आता।
असली मतलब जो चुभता है
यह कहानी जानवरों की नहीं है।
यह हमारी है।
शेर ताकत है।
जो सवाल नहीं करता।
जो सिर्फ लेता है।
लोमड़ी वह इंसान है जो मीठी बातें करता है, लेकिन खुद हमेशा सुरक्षित रहता है।
और गधा वह हिस्सा है जो हम सबके भीतर कहीं न कहीं होता है।
जो चाहता है कि उसे भी खास माना जाए।
जो बिना सोचे किसी पर भरोसा कर लेता है।
हर सलाह समझदारी नहीं होती
जो लोग आपको आगे बढ़ने के लिए उकसाते हैं, जरूरी नहीं कि वे आपका भला चाहते हों।
कुछ लोग आपके भरोसे से कमाते हैं।
कुछ लोग आपकी महत्वाकांक्षा से।
कुछ लोग आपकी चुप्पी से।
मीठे शब्द अक्सर सच्चाई को ढक देते हैं।
असली खतरा शेर नहीं था
गधे को लगा कि शेर उसका दुश्मन है।
असल में दुश्मन वह पल था जब उसने पहली चेतावनी को नजरअंदाज किया।
जिंदगी हमेशा एक बार इशारा देती है।
एक गलत सौदा।
एक टूटा हुआ भरोसा।
एक ऐसा अनुभव जो भीतर से गलत लगता है।
उस पल को समझना ही समझदारी है।
समझदारी का मतलब डरपोक होना नहीं है
सवाल पूछना कमजोरी नहीं है।
पीछे हट जाना हार नहीं है।
हर मुकुट आपके लिए नहीं होता।
हर मौका आपका नहीं होता।
कुछ रास्ते आपको बड़ा नहीं बनाते, सिर्फ खत्म कर देते हैं।
अंत में एक खामोश सीख
अगर किसी चीज ने आपको एक बार तोड़ा है, तो दोबारा उसे आजमाने से पहले रुकिए।
जो सलाह सिर्फ देने वाले को फायदा पहुंचाए, वह सलाह नहीं होती।
और जो मुकुट दर्द की कीमत मांगता है, वह पहनने लायक नहीं होता।
क्योंकि सही जगह पर पहुंचने के लिए खुद को खोना जरूरी नहीं होता।