हमारी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा “कैसे” में उलझा रहता है।
यह कैसे होगा।
यह कब होगा।
यह मेरे साथ ही क्यों होगा।
हम भविष्य को पकड़ कर रखना चाहते हैं, उसे समझ लेना चाहते हैं, उसके हर मोड़ का नक्शा पहले से बना लेना चाहते हैं।
लेकिन यहीं से बेचैनी शुरू होती है।
क्योंकि जीवन कभी भी नक्शे के अनुसार नहीं चलता।
यह विचार कि सब कुछ हमारे नियंत्रण में होना चाहिए, भीतर एक स्थायी तनाव पैदा करता है।
हम वर्तमान में होते हुए भी भविष्य में जीने लगते हैं।
शरीर आज में होता है, मन कल में भटकता रहता है।
चिंता छोड़ दीजिए कि यह कैसे होगा।
बस इतना जानिए कि यह होगा।
जब हम “कैसे” पर ज़ोर देते हैं, तब हम जीवन पर अविश्वास करते हैं
हर बार जब हम यह पूछते हैं कि यह कैसे होगा, तब असल में हम यह कह रहे होते हैं कि हमें जीवन की प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है।
हमें लगता है कि अगर हमने हर चीज़ की योजना नहीं बनाई, तो कुछ गलत हो जाएगा।
लेकिन ज़िंदगी का सबसे सुंदर हिस्सा योजनाओं से बाहर ही घटता है।
जिन अवसरों ने आपको बदल दिया, वे शायद आपकी सूची में नहीं थे।
जिन लोगों ने आपका जीवन मोड़ा, वे शायद आपकी योजना का हिस्सा नहीं थे।
जिन दरवाज़ों ने आपको आगे बढ़ाया, वे शायद आपने खोजे ही नहीं थे।
वे अपने समय पर खुले।
सही दरवाज़े अपने आप खुलते हैं
हम अक्सर गलत दरवाज़ों को ज़ोर से धक्का देते रहते हैं।
वहाँ जहाँ प्रयास थकान बन जाता है।
जहाँ अपनापन नहीं, केवल संघर्ष मिलता है।
लेकिन जीवन का नियम अलग है।
जो आपके लिए है, वह ज़बरदस्ती से नहीं मिलता।
वह सहजता से आता है।
जब सही समय आता है, तो दरवाज़े बिना आवाज़ के खुलते हैं।
आपको समझ भी नहीं आता कि चीज़ें इतनी सरल कैसे हो गईं।
जो अवसर पहले असंभव लग रहे थे, वे अचानक सामान्य लगने लगते हैं।
जो रास्ते बंद लग रहे थे, वे खुद रास्ता देने लगते हैं।
सही लोग भी सही समय पर ही आते हैं
कई बार हम गलत लोगों को पकड़ कर रखते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि हमें डर लगता है कि कहीं कोई और न मिले।
लेकिन सही लोग कभी ज़बरदस्ती नहीं आते।
वे जीवन में प्रवेश करते हैं, जैसे हमेशा से वहीं थे।
वे आपको थकाते नहीं, बल्कि शांत करते हैं।
वे आपको साबित करने के लिए मजबूर नहीं करते, बल्कि स्वीकार करते हैं।
जब समय सही होता है, तब संबंध बोझ नहीं बनते।
वे सहारा बनते हैं।
धैर्य कोई कमज़ोरी नहीं है
अक्सर धैर्य को इंतज़ार की सज़ा समझ लिया जाता है।
लेकिन धैर्य का अर्थ रुक जाना नहीं है।
धैर्य का अर्थ है भीतर से स्थिर रहना।
धैर्य का मतलब यह नहीं कि आप कुछ नहीं कर रहे।
धैर्य का मतलब है कि आप बेचैनी के साथ काम नहीं कर रहे।
आप अपना कर्म करते हैं।
आप ईमानदारी से प्रयास करते हैं।
लेकिन परिणाम को कस कर पकड़ कर नहीं रखते।
खुले रहना ही सबसे बड़ी तैयारी है
जब हम बहुत सख्त हो जाते हैं, तब जीवन के संकेत दिखना बंद हो जाते हैं।
हम केवल वही देखते हैं जो हम देखना चाहते हैं।
लेकिन जब मन खुला होता है, तब छोटी घटनाएं भी रास्ता दिखा देती हैं।
एक बातचीत।
एक संयोग।
एक विचार।
खुलापन हमें लचीला बनाता है।
और लचीलापन ही जीवन के साथ चलने की क्षमता है।
दिव्य समय कोई कल्पना नहीं है
दिव्य समय का अर्थ यह नहीं कि सब कुछ चमत्कार से होगा।
इसका अर्थ यह है कि हर चीज़ का एक स्वाभाविक क्रम होता है।
बीज आज बोया जाता है।
फल कल नहीं, सही मौसम में आता है।
अगर हम बीज को हर दिन खोद कर देखें कि उगा या नहीं, तो वह कभी नहीं उगेगा।
विश्वास ही उसे बढ़ने देता है।
निष्कर्ष: भरोसा एक अभ्यास है
चिंता छोड़ना कोई एक दिन का निर्णय नहीं है।
यह रोज़ का अभ्यास है।
हर बार जब मन फिर से “कैसे होगा” में फँसे,
उसे धीरे से वापस वर्तमान में लाना है।
अपने आप से कहना है:
मैं अपना काम कर रहा हूँ। बाक़ी समय संभाल लेगा।
क्योंकि जब आप धैर्य रखते हैं,
जब आप खुले रहते हैं,
तब जीवन अपने तरीके से जादू दिखाता है।
बिना शोर के।
बिना घोषणा के।
सही समय पर।